‘ब्रज के संतों ने और ब्रजवासियो ने तो कभी मोक्ष की कामना भी नही की क्योकि ब्रज में इह लीला के समाप्त होने पर ब्रजवासी, ब्रज में ही वृक्ष का रूप धारण करता है अर्थात ब्रजवासी मृत्यु के पश्चात स्वर्गवासी न होकर ब्रजवासी ही रहता हैं और यह क्रम अनन्त काल से चल रहा है। ऐसी मान्यता है ब्रज की। वराह पुराण कहता है कि पृथ्वी पर 66 अरब तीर्थ है और वे सभी चातुर्मास में ब्रज में आकर निवास करते है। यही वजह है कि “ब्रजयात्रा” करने वाले इन दिनों यही खिंचे चले आते है। हजारों श्रध्दालु ब्रज के वनों मे डेरा डालें रहते है। ब्रज चौरासी कोष यात्रा में दर्शनीय स्थलों की भरमार है। पुराणों के अनुसार उनकी उपस्थिति अब कही-कही रह गयी है।